My Account

   You are here: Home > Inside Woodworking > Article

 

उद्योग जगत के समाचार

 

कच्चे माल की कमी, किंमतों में वृद्धि और लेबर प्रोब्लेम

 

यमुनानगर

देश के बाजारों में सबसे अधिक प्लायवुड की पूर्ति करने वाला यमुनानगर का प्लायवुड उद्योग इस समय अनेक मुश्किलों का सामना कर रहा हैं । पोपलर, नीलगिरी की कमी के कारण उसके कोर में 25 से 30% की वृद्धि हुई है फिर भी माल की कमी महसूस की जा रही है । ग्लू और अन्य केमिकल्स के दाम में वृद्धि और ऊपर से लेबर प्रोब्लेम के कारण उत्पादकों ने प्लायवुड में 4 से 5% दाम में वृद्धि के बाद भी उत्पादन में 25 से 40% तक कटौती करना पड़ा है । फेक्टरी में मजदूरों की उपस्थिति 60 से 70% जितनी है । मार्च - 09 तक प्लायवुड की माँग धीमी रही किन्तु अब उसमें थोडा सुधार देखने को मिल रहा है । उत्पादको को यह आशा है कि दिपावली तक प्लायवुड में 5% की वृद्धि होगी ।

गुजरात

गुजरात में प्लायवुड उद्योग की हालत यमुनानगर जैसी है ।

खासकर पोपलर, नीलगिरी कोर पर चल रहे एकमों को ज्यादा कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है । पैसा देने के बावजूद भी कोर विनियर जल्दी मिलता नहीं है । लेबर प्रोब्लेम और केमिकल्स के भावों में हुई बढौती तो परेशान कर ही रही है । यमुनानगर से पोपलर कोर जो पहले 70 से 80 पैसे (फूट के) के बीच मिलता था वह अब एक रुपया तक पहुँच गया है । अडूसो, नीलगिरी कोर भी लगभग उसी भाव के करीब पहुँच गया है । फिर भी उस पर संपूर्ण निर्भर नहीं रह सकते । गर्जन कोर उसके हिसाब से ज्यादा महँगा पडता है । गुजरात के प्लायवुड, फ्लशडोर, विनियर के 200 जितने युनिट है । जिसमें ज्यादा से ज्यादा युनिट फ्लशडोर्स के उत्पादन में लगे हुए है किन्तु पिछले दो सालों की तुलना में उसके बिक्री में थोडी कमी आई है । जिसके कारण अंतिम छ-आठ महिनों में 2 से 3% तक भाव में घाटा देखने को मिला था किन्तु अब भाव स्थिर है । बहुत-सी जानी-पहचानी बड़ी लेमिनेट कंपनी के निर्यात के ओर्डर घटने के कारण लोकल बाजार की ओर अधिक नजर दौडानी पडी है । नई दो-तीन लेमिनेट कंपनी गुजरात में आ रही है जिससे स्पर्धा में वृद्धि की संभावना है ।


अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल प्रदेश राज्य के प्लायवुड और टीम्बर उद्योग का अस्तित्व भय में

1996 से सुप्रिम कोर्ट ने लकडी काटने पर कडक नियमों को लादा था जिसकी असर टीम्बर और प्लायवुड उद्योग पर हुई है । बहुत सी प्लायवुड फेक्टरी और सॉ मीलें बंद पडी है । एक अंदाज के अनुसार राज्य सरकार को 178 करोड रु. की आवक इन दो उद्योग के द्वारा ही हो रही थी । राज्य के युनिट मिनिस्टर श्री वी. नारायन स्वामी ने केन्द्र सरकार को एक पत्र में लिखा कि राज्य को “ग्रीन बोनस” दी जाए ।
अरुणाचल प्रदेश का 82% क्षेत्र जंगल के अंतर्गत आता है । आवक के लिए राज्य सरकार के पास ये बडा साधन है । यदि केन्द्र सरकार दे तो उत्पादको तथा राज्य सरकार को बडा फायदा होगा ।


 

 

Go to Top

 


 

Home  l  Directory  l  Premium Suppliers  l  Buy Offers  l  Sell Offers   l  Products  |  Articles  l  Trade Shows  My Account

Privacy Policy  Security  l  Help  l  Contact Us

 

  © 2006 Leepee. All rights reserved.